यूनेस्को के द्वारा घोषित विश्व विरासत स्मारक:नालंदा के खंडहर

राजीव कुमार झा

प्राचीन नालंदा महाविहार के ध्वंसावशेषों को संरक्षित करने के लिए पुरातत्व विभाग के द्वारा काफी काम पिछले दशकों में किया गया है। नालंदा के उत्खनन के बाद यहां जो प्राचीन अवशेष प्राप्त हुए उनको स्थानीय संग्रहालय में देखा जा सकता है और नालंदा में मिली चीजों को राष्ट्रीय संग्रहालय के अलावा देश के अन्य संग्रहालयों में भी संग्रहित किया गया है।
नालंदा के खंडहर अत्यंत प्राचीन हैं और इनको गुप्त सम्राट कुमारगुप्त प्रथम ने चौथी शताब्दी सन् में यहां स्थापित किया था। यह स्थान महान बौद्ध भिक्षु सारिपुत्त की जन्मभूमि है और यहां अपनी धम्म यात्रा के क्रम में अशोक का भी आगमन हुआ था। नालंदा का विध्वंस मुस्लिम आक्रमणकारी बख्तियार खिलजी के हमले और उसके द्वारा की गयी आगजनी से हुआ।
गुप्त साम्राज्य के पतन के बाद नालंदा के महाविहार को बंगाल के पालवंश के राजाओं के अलावा कन्नौज के राजा हर्षवर्धन का भी संरक्षण प्राप्त हुआ। नालंदा यूनेस्को की सूची में विश्व धरोहर है।

