साहित्य सृजन संवाद

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यात्रा वृत्तांत

दक्षिण भारत की मेरी यात्रा

अंजना कुमारी केशरी

अंजना कुमारी केशरी

दक्षिण भारत की यह यात्रा मेरे जीवन की सबसे अविस्मरणीय और आध्यात्मिक यात्राओं में से एक रही। इस यात्रा के दौरान मुझे अनेक पवित्र तीर्थस्थलों के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। रामेश्वरम धाम में स्थित 22 पवित्र कुंडों के जल से स्नान करना मेरे लिए अत्यंत दिव्य अनुभव था। वहाँ का शांत वातावरण और अटूट आस्था मन को गहरे तक स्पर्श कर गई। इसके पश्चात दक्षिण भारत के प्रसिद्ध गोल्डन टेंपल के दर्शन किए। स्वर्णिम आभा से चमकता मंदिर, उसकी भव्यता और आध्यात्मिक वातावरण मन को अद्भुत शांति प्रदान कर रहा था। इस यात्रा का सबसे प्रेरणादायक क्षण तब आया जब मेरी भेंट नाथ संप्रदाय के एक वंशज से हुई। उन्होंने अपना सर्वस्व दान कर गुजरात के गीर क्षेत्र में संन्यास ग्रहण करने का निश्चय किया था। उनके चेहरे पर वैराग्य और आत्मिक संतोष स्पष्ट झलक रहा था। उनसे हुई बातचीत ने त्याग और आध्यात्मिक जीवन का वास्तविक महत्व समझाया। इस यात्रा का सबसे विशेष और भावपूर्ण पड़ाव 1 जनवरी को आया, जब मुझे तिरुमला स्थित भगवान श्री वेंकटेश्वर (तिरुपति बालाजी) महाराज के दिव्य दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। प्रभु के दर्शन करते ही मन श्रद्धा, भक्ति और अपार आनंद से भर उठा। ऐसा प्रतीत हुआ मानो इस संपूर्ण तीर्थयात्रा का उद्देश्य उसी दिव्य क्षण में पूर्ण हो गया हो। यह यात्रा मेरे लिए केवल विभिन्न तीर्थों का भ्रमण नहीं थी, बल्कि आत्मिक शांति, आस्था, त्याग और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास का अनुपम अनुभव भी थी। इसकी स्मृतियाँ जीवन भर मेरे हृदय में श्रद्धा और प्रेरणा का स्रोत बनी रहेंगी।यह क्रम अधिक स्वाभाविक लगेगा क्योंकि अंत में 1 जनवरी को तिरुपति बालाजी के दर्शन पूरे यात्रा-वृत्तांत का भावपूर्ण समापन करते हैं।