साहित्य सृजन संवाद

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संस्मरण

साहित्य लेखन: डॉ रमा जैन अग्रवाल

प्रस्तुति: राजीव कुमार झा

प्रस्तुति: राजीव कुमार झा

मेरे माता-पिता बहुत संस्कारी थे । जैन धर्म का पालन करने वाले थे। मैंने एजुकेशनल साइकोलॉजी में पीएच.डी किया। अखिल भारतीय लेखिका परिषद कवयित्री महादेवी वर्मा जी के द्वारा स्थापित है। यह बहुत पुरानी संस्था है। वर्तमान में मैं इसकी कोषाध्यक्ष हूं । यह संस्था अध्यक्ष मंत्री अंजना मिश्रा द्वारा चलाई जा रही है। मैं बहुत उत्साहपूर्वक इसमें भाग लेती हूं। मैं कहानी कविता, लघुकथा अन्य विषयों पर भी अपने विचार प्रकट करती रहती हूं। मेरी तीन पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं । 1. गहराते सिंधु के मोती 2.मुस्कुराता दर्द 3.खिलखिलाती खुशी इस तरह से तीन पुस्तकें लोकर्पित हैं। "कांटों से क्यों उलझ रहे तो, आओ खुशियों को महकाएं भौरों की गुनगुन के संग संग, मधुर मधुर गीतों को गाएं।। जिंदगी पल भर की है इसका कोई रिश्ता नहीं पल में जो पैदा हुआ , पल भर में मिट जाता वहीं तो जिंदगी की खुशी के गीत कुछ अपने बनाए चलो रोते कोई बच्चे को ही , जाकर के हंसाए।" प्रारंभ में अपॉइंटमेंट प्राथमिक में हुआ फिर स्नातक वेतन क्रम में आए । इसके पश्चात डिग्री मे एजुकेशन का शिक्षण कार्य किया। आकाशवाणी में 2 साल संस्कृत प्रशिक्षण कार्य । कहानी वाचन ए प्लस में ,एवं विभिन्न प्रकार के नई समस्या पर लेख वाचन हमको। मैं नारी हूं मैं शक्ति हूं मैं देवी विश्वास करो मेरे रक्त से पलनेे वालों मत मेरा बलिदान करो" अभी साहित्य समाज का दर्पण है नारी तू अबाला नहीं बालकों का बचपन मत छीनो। आदि लेख भी लिखे हैं। बूढ़े मां-बाप को सम्मान दो वृद्धाश्रम मत भेजो। लेख चल रहे हैं। साहित्य भूषण अवार्ड प्राप्त हो चुका है। शिक्षकरत्न प्राप्त हुआ। रोटरी क्लब वेस्ट में अध्यक्ष पद पर भी रह चुके हैं । पोलियो पर बहुत काम किया । कैम्प लगाकर पोलियो ड्राप पिलाई। अब विश्राम ले लिया तो।