साहित्य सृजन संवाद

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साक्षात्कार

कवि अखलेश कुमार मांझी का राजीव कुमार झा के द्वारा लिया गया साक्षात्कार

अखलेश कुमार मांझी

अखलेश कुमार मांझी

हिंदी को भारत की सर्वश्रेष्ठ भाषा कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी और मुझे गर्व है कि मैंने हिन्दी से अपनी शिक्षा पूर्ण की। हिन्दी भाषा का बोलचाल में उपयोग करने में गर्व महसूस करता हूँ। हिन्दी का अध्ययन कर मैंने उसकी विरासत और महत्व को समझा है। हिन्दी भारतीय संस्कृति का स्तंभ है जो हमें एक-दूसरे के भावों को स्पष्ट रूप से समझने में मदद करती है। इसी ज्ञान से मैंने अपने जीवन को सरल और आसान बनाया है। मैं अखलेश कुमार मांझी 'अखिल' ग्राम खभरा, तहसील सिहोरा, जिला जबलपुर, मध्य प्रदेश का रहने वाला हूं। मेरे पिताजी का नाम श्री रामस्वरूप मांझी एवं माताजी का नाम श्रीमती ज्ञान भाई मांझी है। मेरी प्राथमिक से हायर सेकेंडरी तक की शिक्षा मेरे ही गांव खभरा में हुई। माता-पिता ने विषम परिस्थितियों में मुझे पढ़ाया। आगे की शिक्षा मैंने एम.ए. हिन्दी साहित्य से एस.एस. कॉलेज सिहोरा, विश्वविद्यालय जबलपुर से प्राइवेट रूप से प्राप्त की है। मनुष्य को हर समय संघर्ष से गुजरना पड़ रहा है और इस संघर्ष भरे जीवन में सामंजस्य बनाना आसान नहीं होता। साहित्य अपने शब्दों के माध्यम से गद्य व पद्य रूप में इसे वर्णित करता है। लेखक के समसामयिक विचार पाठक को अपनी ओर आकर्षित करते हैं और उन्हें जीवन में संघर्ष के साथ सामंजस्य बनाने में मदद करते हैं। जैसे दुष्यंत कुमार जी का शेर: _सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,_ _सारी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।_ _मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही,_ _हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए_ और मेरा एक मतला और शेर: _जो तुझे कम करे उससे घनघोर कर,_ _पर सदा के लिए दिल न कमज़ोर कर,_ _जो तुझे प्यार दे प्यार करना उन्हें,_ _जो करे तुझ को इग्नोर - इग्नोर कर_ * आजकल समाज में पाश्चात्य सभ्यता की ओर आकर्षण बढ़ा है। विचारों में भिन्नता, संस्कृति और नैतिकता का पतन ये सभी मानव समाज के लिए ठीक नहीं हैं। और इसमें विराम लगाना असंभव-सा लग रहा है। साहित्य लेखन की प्रेरणा मुझे 11वीं कक्षा में मिली। जहां बड़ी-बड़ी बातों को कवि एक-दो लाइन में कह देते थे। उनकी कविताओं को पढ़कर मन में आया कि मुझे भी कविता लिखनी है और मैं तुकबंदी करने लगा। मैं बाल कविता और ग़ज़ल लिखता हूं। मेरी मुख्य विधा ग़ज़ल है। लेखक के रूप में मेरे मन को सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाली बात है - आज के समय में आदमी के चेहरे के अंदर छिपा दूसरा चेहरा। साथ ही साहित्य में व्याकरण का महत्व, जिसके बिना साहित्य पूर्ण नहीं होता। और प्रेम, विरह, नफ़रत आदि विषय मुझे छूते हैं।