जगदीश कौर से राजीव कुमार झा की बातचीत

जगदीश कौर
प्रयागराज की कवयित्री जगदीश कौर से राजीव कुमार झा की बातचीत...
प्रश्न:आपने पंजाबी में भी काव्य लेखन किया है। पंजाबी में आपने जो कविताएं लिखी हैं उनमें प्रवाहित अपने हृदय के भावों के बारे में बताएं?
उत्तर: जी,मैने पंजाबी में भी लेखन किया है, मैने गुरुओं उनके सिद्धांतों, गुरबाणी के बारे में और समाज में हो रही घटनाओं, रूढ़िवादी विचारों के बारे में अपने विचारों को शब्दों में बुनने का प्रयास किया है, मस्तिष्क में उभरे हुए चित्र को कलम से उकेरने का प्रयास किया है।
प्रश्न :गुरुद्वारे में सिक्ख मतावलंबियों के द्वारा पंजाबी में गाये जाने वाले गुरुबाणी में समाहित धर्म और अध्यात्म के संदेशों का सार क्या है?
उत्तर:गुरबाणी का सार मानवता जैसे विचारों को अपने आत्मा में समाहित कर सबको एक परमपिता की संतान मानते हुए सबके साथ समता, सौहार्द,भाईचारा की भावना रखना, अपने साथ - साथ कमजोर और निम्न वर्गीय लोगों के अंदर उस ईश्वर की अनुभूति करते हुए उन्हें आगे बढ़ाने का प्रयास करना, उनकी छोटी- छोटी जरूरतों को पूरा करने के लिए उनको हर रूप से सहयोग करना, बल्कि उन्हें मार्गदर्शन देना कि वो स्वयं कैसे सक्षम है उनको पूरा करने के लिए।
गुरबाणी का संदेश है सभी पहले एक सच्चे अच्छे मानव बने, अपने जमीर, इंसानियत को जिंदा रख ,सब आत्म निरीक्षण करें कि परम पिता ने उसे जिस चीज के लिए भेजा वो उसे कर रहे हैं या मायावी संसार में लिप्त होकर अपना कर्म धर्म तो नहीं भूल गए। हमेशा नैतिक मूल्यों, सच का पैरोकार बनना ,अपने समाज, देश, राष्ट्र के लिए सब कुछ निछावर कर देना,उसकी शांति, उन्नति के लिए सदा प्रगतिशील रहना।
प्रश्न:आपकी रुचि हिंदी कविता लेखन में कब और कैसे क़ायम हुई? आम तौर पर हिंदी में सामाजिक - राजनीतिक और धार्मिक प्रसंगों के अलावा नैतिक विषयों पर कविताओं का ज्यादातर लेखन होता है।खुली शैली में लिखी गईं अपनी हिंदी कविता के भाव विचार भाषा और शैली के बारे में जानकारी दीजिए।
उत्तर:जी, लिखती तो मैं बचपन से थी, जब से मुझे ज्ञात हुआ कि उस परमात्मा ने मुझे यह अमूल्य उपहार दिया है कि मैं अपने चारों ओर वातावरण में घटित चीजों को देखूं ,चिंतन मनन करूँ, विवेकपूर्ण कपटरहित निष्पक्ष भाव से कलम चला सकूँ, मेरी कविता जहाँ समाज में घट रही बुराईयों, रूढ़िवादी विचारों में चोट है, वहाँ घटित अच्छाइयों की प्रशंसा करना, आध्यात्मिक, नैतिक मूल्यों, अच्छे मानव के समाज,देश , राष्ट्र के हित और दूसरे मानव के प्रति क्या कर्तव्य है उसको दृष्टिगोचर कर सकूं।
प्रश्न :अपने घर परिवार माता- पिता, शिक्षा दीक्षा के बारे में बताएं।
उत्तर:माता जी हाईस्कूल तक पढ़ी थीं,पिता जी कम पढ़े थे, मेरे दादा जी ने बहुत पढ़ाई की थी, अंग्रेजी, उर्दू,पंजाबी, गणित जैसे विषयों में उनकी अच्छी पकड़ थी, गुरुवाणी, सिख इतिहास से संबंधित बहुत ज्ञान था।
पति हाईस्कूल पढ़े हैं, बच्चे अभी सी. ए की तैयारी कर रहे हैं।
प्रश्न :आप अपने प्रिय कवियों और लेखकों की फेहरिस्त में किन साहित्यकारों का नाम शामिल करना चाहेंगी?
उत्तर: कवि तुलसी, खुसरो से छंद लिखना सीखना चाहती, कबीर से दोहे और जिंदगी का मर्म सीखना चाहती भारतेंदु हरिश्चंद्र से देशभक्ति, रामचंद्र शुक्ल, रविन्द्रनाथ टैगोर , रामवृक्ष बेनपुरी , अमृता प्रीतम से अपने जीवन, कबीर से ईश्वर के प्रति रहस्यमय विचार, मीरादेवी जी से सशक्त नारी होने की पहचान, दुष्यंत कुमार, गुलाम अली से गज़ल, प्रेमचन्द से उपन्यास की कला सीखना चाहती।
प्रश्न:सोशल मीडिया पर भी आप लेखक और उनके साहित्य से संबंधित कार्यक्रम पेश कर रही हैं।
इसमें आपकी उपलब्धियों के बारे में जानकार खुशी होगी?
उत्तर:जी बिल्कुल, जगदीश साहित्य संस्थान प्रयागराज की संस्थापिका होने के नाते और एक इंसान , देशभक्त होने के नाते समाज को आईना दिखाने, उनको विवेकपूर्ण चिंतन मनन करने के लिए ऐसे उत्कृष्ट कवियों का गुलदस्ता सजा कर उसे सोशल मीडिया के माध्यम से जन -जन तक पहुंचाने का छोटा परंतु सफल और सशक्त प्रयास कर रही, कुछ खुद के लेखन, कुछ अनुभव प्राप्त साहित्यकारों, कुछ उभरते हुए विचारशील कवियों के माध्यम से यह प्रयास जारी है।
