साहित्य सृजन संवाद

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निबंध

गोस्वामी तुलसीदास और उनका महाकाव्य रामचरितमानस

राजीव कुमार झा

आज हिंदी के महान कवि तुलसीदास की जयंती है। उन्होंने सारे संसार को सदाचार का संदेश दिया दिया। इसके अलावा उन्होंने अपने काव्य लेखन से मानवता को संकट के काल आशा और विश्वास कु ओर उन्मुख किया। तुलसीदास मध्य काल के कवि हैं और उस समय देश में इस्लामिक शासन था। समाज में धर्म के नाम पर अत्याचार ओर उत्पीड़न कि दमन चक्र चल रहा था। विद्वानों का मत है कि ऐसे ही चुनौतीपूर्ण दौर में तुलसीदास ने रामकथा को आधार बनाकर समाज में लोगों को मानव धर्म के प्रतिपालन की ओर उन्मुख किया। तुलसीदास के काव्य का मूल स्वर जीवन की समस्त विषमता के बीच सामंजस्य के भावों का समाज में प्रतिस्थापन है ‌ । इस दृष्टि से तुलसीदास को सिर्फ कवि नहीं कहा जा सकता है बल्कि वह समाज के पथ-प्रदर्शक और पतनोन्मुख मानवजाति के उद्धारक भी माने जाते हैं। ग्रियर्सन ने इसीलिए उनको महात्मा बुद्ध के बाद भारत का दूसरा लोकनायक कहकर संबोधित किया था। रामचरितमानस जो तुलसीदास के द्वारा रचित महाकाव्य है, यह इसे विश्व साहित्य का सबसे समादृत ग्रंथ कहा जाता है और इसमें कवि के रूप में मानव धर्म का प्रतिपादन किया है और आलोचकों का मानना है कि इस महाकाव्य के समुचित अनुशीलन जिसे हिंदू धर्मावलंबी नवाह परायण कहते हैं , उससे आत्मा का उद्धार हो जाता है। सचमुच रामचरितमानस की चौपाइयां और इसके दोहे सोरठे अत्यंत सरस और ज्ञानवर्धक हैं जिनको पढ़ने - सुनने से आत्मा पवित्र हो जाती है और सांसारिक जीवन की समस्त कल्मषता से मनुष्य को छुटकारा मिल जाता है। तुलसीदास ने इस ग्रंथ में ज्ञान, बुद्धि ,विवेक और नीति के समुचित समावेश से रामकथा को नया रचनात्मक आयाम प्रदान किया है और समस्त संसार के सुख शांति और आनंद की कामना की है। आलोचक उनको लोक-मंगल का कवि मानते हैं। रामचरितमानस की कथा अत्यंत पावन है। आज भी इसका वाचन और श्रवण सारे देश में होता है।
गोस्वामी तुलसीदास और उनका महाकाव्य रामचरितमानस