भादों का महीना

अनीता शरद झा
सत्यकथा
भादों का महीना
(रायपुर पुरानी बस्ती की घटना)
अनिता शरद झा
वकील साहब के बाबा स्व. श्री शिव शंकर झा जी आचार्य सरयूकांत झा के पिता श्री शंकर झा तांत्रिक खानदान से थे। उनके घर में चार हजार वर्ग फिट में फैला एक नीम पीपल वृक्ष विशालकाय, वर्षों पुराना पीपल का वृक्ष है। जो अभिमंत्रित है। आज भी उस बाउंड्री वाल के अंदर कभी कोई अप्रिय घटना नहीं होती।
भादो का महीना घोर बारिश, बिजली कड़क रही थी।
वकील साहब के साडू श्री नीलमणि झा जी और उनके साडू भाई के. के. ठाकुर जी का घर जहाँ चारों गलियाँ मिलती हैं, वहीं तक दोनों साडू भाई साथ आए और रुक गए।
अब वकील साहब को अपने घर जाना था। उन्होंने शॉर्टकट सोचा। सामने कीर्ति नाथ ठाकुर जी, छोटे फूफा जी के घर की गली से निकलने लगे। गली में घोर अंधेरा।
तभी पीछे से आवाज आई - "वकील महाराज, पाय लागी! मैं साथ चलूँ?"
पीछे कुंजू धोबी था। जो उसी गली में रहता था।
वकील साहब ने हामी भर दी - "हाँ, चलो कुंजू।"
कुंजू पीछे-पीछे चलने लगा। बातों ही बातों में वकील साहब ने कहा - "पायलट महाराज प्रेम नाई अब नहीं है, सतनाथ भी इस दुनिया में नहीं है।"
कहते-कहते अचानक उनके मन में बिजली सी कौंधी - *"अरे! कुंजू धोबी भी तो कुछ दिन पहले ही मर गया! ये कहाँ से आ गया?"*
डर के मारे उन्होंने झट से पीछे पलट कर देखा - वहाँ कोई नहीं था!
वे सरपट भागे। कीर्ति नाथ ठाकुर की गली छोड़कर बड़े सड़क वाले रास्ते से घर पहुँचे। हाँफ रहे थे।
उनका कमरा लाल चौरा के बाजू में था। उसके ठीक पीछे संकरानंद बाड़ा के शिव शंकर झा जी की बाउंड्री वाल लगी थी। एक ही दीवार।
और देखा तो - *उसी बाउंड्री वाल पर कुंजू धोबी भूत बनकर बैठा था!*
और हँसते हुए कह रहा था - "मैं तो आ गया। जो चाहो मुझसे काम ले सकते हो!"
वकील साहब काँप गए। उन्होंने जोर से बाबा शिव शंकर का नाम लेकर उसे भगाया। वह भाग खड़ा हुआ। पर वकील साहब रात भर डर से काँपते रहे।
लोगों ने कहा - वहम होगा। बात आई-गई हो गई।
कुछ दिन बाद वकील साहब अपने भाई के साथ बिलासपुर वाले प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित जी से मिलने गए।
पंडित जी ने देखते ही कहा - "आचार्य सरयूकांत झा जी के बेटे, तांत्रिक शिव शंकर के दोनों नाती हो? क्या पूछना चाहते हो? मैं प्रति प्रश्न पाँच रुपये लेता हूँ।"
वकील साहब ने सामने दो पाँच के नोट रख दिए।
पंडित जी ने रामलाल को बुलाया। कहा - "कुदुरदंड, गोड़पारा वाले रामलाल को बुलाओ, वही उत्तर देगा।"
रामलाल आया। उसे सामने बेंच पर बिठाया। पंडित जी ने संबोधन किया और रामलाल ने बिना कुछ पूछे, उनके घर का पूरा नक्शा खींच दिया!
दोनों भाई अवाक रह गए। सारी बातें सही थीं।
रामलाल बोला - "आपके यहाँ लड़का होगा। आपके बाबा जी लाल कपड़ा पहने बैठे हैं। जिन्होंने सारा घर अभिमंत्रित कर रखा है। उस घर में कभी आपदा-विपत्ति नहीं आएगी। वहाँ रहने वाले हमेशा फलते-फूलते रहेंगे।"
यह सुनकर वकील साहब ने हिम्मत कर कुंजू धोबी वाली पूरी आपबीती सुनाई।
पंडित जी मुस्कुराए और बोले -
*"आपको उसे भगाना नहीं था! वह तो आपके बाबा की बंधी हुई सीमा में बंधकर आपका सेवक बनने आया था। वह अभिमंत्रित बाउंड्री ही तो है जो बुरी आत्मा को भी सेवक बना देती है। आपने अवसर खो दिया।"*
वकील साहब आज भी सोचते हैं - वह भूत नहीं, बाबा की सिद्धि की परीक्षा थी।बाबा जी ९५ वर्ष की आयु तक स्वस्थ प्रसन्न थे अपने छोटे बेटे उमाकांत झा जो नागपुर में रहते उनसें कहा- जन्म मृत्यु का एक ही दिन होगा ! और तुम्हें ही मेरा क्रिया कर्म करना होगा तीसरे दिन से बड़ा बेटा याने सरयूकांत झा ने आगे काम किया! ठीक हुआ भी ऐसा गंगोत्री के दर्शन के बाबा जी दिखाई दिए थे!
बड़े के ना रहने पर जब छोटे नाती के साथ धार्मिक यात्रा पर गए ,और उन्होंने प्राण त्याग दिया बेटे के ना रहने पर प्राण त्याग दूँगा ! अलौकिक प्रतिभा के धनी थे ! पुरानी बस्ती महामाया मंदिर की तांत्रिक पुजारी अपना कार्य भार अपने बड़े बिहार सतलखा के दामाद जगदीश्वर झा को समर्पित किया !
