साहित्य सृजन संवाद

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चित्रकला:ममता राजपूत और उनका उड़ान आर्टिस्ट ग्रुप

प्रस्तुति: राजीव कुमार झा

प्रस्तुति: राजीव कुमार झा

चित्रकला:ममता राजपूत और उनका उड़ान आर्टिस्ट ग्रुप
मेरा चित्रकला में रुझान बचपन से ही है । मैं बचपन से ही उन विलुप्त कलाओं को ढूंढ़ती थी जो कलाएं हमारे बीच में से खत्म हो गई थीं ।हमने अपनी नानी के गांव एवं अन्य गांव -गांव जाकर हम लोगों ने इस चीज को सर्च किया कि ऐसी कौन सी चित्रकलाएं थीं जो हमारे बीच में से विलुप्त हो रही हैं। हम उस पर काम करते आ रहे थे और अब सरकार भी विलुप्त कलाओं पर काम कर रही है जिस पर हम संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश के द्वारा भी इन विलुप्त कलाओं पर संरक्षण कार्य किया जा रहा है। आजकल बड़े-बड़े शहरों में चित्रकला प्रदर्शनियों का आयोजन हो रहा है। इसमें छोटे-छोटे शहरों से उन विलुप्त कलाओं को निकाल कर एक नई कला के साथ उनका सृजन किया जा रहा है जिससे लोगों को लगता है कि यह कलाएं कुछ नई हैं लेकिन यह कला नई कला नहीं है बल्कि इनमें वही कलाएं हैं जो विलुप्त हो चुकी थीं । हमारे यहां आए दिन त्योहारों पर कला विषयक आयोजन होते हैं। इसमें भाग लेने का अवसर सबको मिलता है लेकिन आधुनिकता के चक्कर में अपने पास सबकुछ होते हुए भी आज के लोग मार्केट से सारी चीज खरीद कर लगाते हैं इसलिए हमारे बीच से यह कलाएं विलुप्त होती जा रही हैं और बड़े-बड़े शहरों में इन कलाओं को एक नए रूप से देखा जाता है और कलाकार भी अपनी - अपनी कलाकृतियों को हृदय से निकालकर कैनवास पर यहां प्रस्तुत करते हैं। कहा जाता है कि पुराने समय में हम अपने बच्चों को कुटुम शिक्षा देते थे और उस कुटुंब शिक्षा से हमारी आने वाली पीढ़ी उन कलाओं से सृजत प्रेरणा प्राप्त कर अपनी आगे की पीढ़ी को भी आगे बढ़ाती थी लेकिन अभी यह सब हमें देखने को नहीं मिलता है। क्योंकि घर में हमारी माता ही और बड़े-बड़े भी उन सब चीजों से वंचित होते जा रहे हैं। बच्चे भी फोन में इतने व्यस्त होते जा रहे हैं कि वह अपने बड़े बूढों और अपने माता-पिताओं के पास नहीं बैठते हैं । अगर वह अपने माता-पिता के पास बैठें और उनके बारे में समझें और पूछें कि उनके पुराने समय में क्या होता था ? उनके बाबा उनके नाना उन्हें कैसी-कैसी कहानी सुनाते थे? कैसे वह दीवारों पर चित्रकारी करते थे? ऐसे कौन से नृत्य थे जो पहले होते थे और आज नहीं होते ?अगर ऐसा होगा तो हमारी आने वाली पीढ़ी उनको एक स्थान देकर आगे बढ़ा सकती है। उड़ान आर्टिस्ट ग्रुप ऐसी प्रथाओं और कलाओं को आगे बढ़ाने के लिए कला प्रदर्शनी के आयोजन में सक्रिय है।